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"सम्मानित फ़िल्में, समय की कसौटी पर खरा उतरने की क्षमता रखती हैं": अनुभव सिन्हा
December 10, 2019 • Jyoti Singh • मनोरंजन

आयुष्मान खुराना अभिनीत अनुभव सिन्हा की "आर्टिकल15" ने निश्चित रूप से इस वर्ष की समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्म होने का शीर्षक सार्थक कर दिखाया है और उसी की गवाही सभी प्रमुख क्रिटीक्स अवार्ड्स हैं जिन्हें "आर्टिकल 15" ने हालिया अवार्ड शो में अपने नाम कर लिए है। फिल्म को मिले इतने बड़े सम्मान से अभिभूत निर्देशक अनुभव सिन्हा ने अपनी भावना साझा की है। उनका मानना है कि किसी भी फिल्म के लिए एक पुरस्कार जीतना, उस फिल्म को संभावित सदाबहार फ़िल्म बनाने जैसा है।

इस बारे में बात करते हुए अनुभव सिन्हा कहते है,"आपके विश्वास में पुरस्कार एक महान आश्वासन हैं। बॉक्स ऑफिस सुनिश्चित करता है कि आप अपना पसंदीदा काम करना जारी रखें। सम्मानित फ़िल्में, समय की कसौटी पर खरा उतरने की क्षमता रखती हैं। इन फिल्मों का जीवनकाल बहुत लंबा होता है लेकिन मैं यह भी मानता हूं कि सभी नामांकित फिल्में विजेता हैं। इतनी शानदार कंपनी में होना एक अद्भुत अनुभव था।"

जबकि अन्य फिल्मों ने लोकप्रिय श्रेणी में जीत हासिल की है, वही आर्टिकल 15 की पकड़ सभी प्रमुख क्रिटीक्स श्रेणी में देखने को मिली, जहां फ़िल्म ने 10 नामांकन में से कुल 5 पुरस्कार अपने नाम कर लिए है। सअनुभव सिन्हा द्वारा निर्देशित "आर्टिकल 15" हमारे देश की गहरी जड़ वाली जाति पदानुक्रम की याद दिलाता है, जो आज भी हमारे देश में मौजूद है और साथ ही इससे संबंधित मानदंड निर्धारित नियमों का पालन न करने के परिणाम को उजागर किया गया था।

फिल्म सबसे यथार्थवादी इन्वेस्टिगेशन ड्रामा है जो वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित है। दलित, बलात्कार से लेकर अन्य अत्याचारों पर, आर्टिकल 15 में समाज की सामाजिक तंत्रिका की पकड़ को दर्शाया गया है। साथ ही एक ऐसी खतरनाक स्थिति को प्रस्तुत किया गया है जिससे देश आज भी निपट रहा है।
अनुभव सिन्हा ने आर्टिकल 15 के रूप में एक ऐसी फिल्म दी है जो इतनी अलग, कठोर और झंझोड़ कर रख देने वाली कहानी होने के बावजूद दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ने में सफ़ल रही है और सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन के साथ फ़िल्म का बोलबाला देखने मिला था।