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19 दिसम्बर को मंहगाई, बेकारी तथा किसानों की समस्याओं पर सपा देगी धरना
December 15, 2019 • Jyoti Singh • उत्तर प्रदेश

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर समाजवादी पार्टी द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक, बेकारी, मंहगाई महिलाओं पर अत्याचार, गन्ना, धान, एवं आलू तथा अन्य किसानों की समस्याओं को लेकर 19 दिसम्बर 2019 को सभी मण्डलीय आयुक्तों के कार्यालय पर प्रातः 10ः30 बजे से सायंकाल 04ः00 बजे तक बड़े पैमाने पर धरना दिया जाएगा।

गन्ना, धान, आलू आदि के किसान घोर संकट में है परन्तु प्रदेश की भाजपा सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनहीन बनी हुई है। बड़ी संख्या में गन्ना किसानों को पर्ची नहीं दी जा रही है जिसके कारण गन्ना माफिया उन किसानों को गन्ना 225 से 250 रू. प्रति कुंतल बेचने पर मजबूर किया जा रहा है। प्रशासन की मिली भगत से गन्ना माफिया गन्ना केन्द्रों पर गन्ना उतराई शुल्क जबरन वसूल कर रहे हैं। किसानों का पिछले वर्षों का लगभग 5000 करोड़ रूपया गन्ना मूल्य अभी तक गन्ना मिल मालिकों द्वारा भुगतान नहीं किया गया है। वर्तमान गन्ना सत्र का भुगतान मिल मालिकों द्वारा नहीं किया जा रहा है।

भाजपा सरकार द्वारा नोटबंदी और जीएसटी लागू करने के बाद देश में व्यापार धंधा चौपट हो गया है। कई व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद हो गए हैं। हजारों नौजवान बेरोजगार हो गए है। केन्द्र सरकार की मेक इन इण्डिया, स्टार्ट अप इण्डिया, मुद्रालोन आदि योजनाओं का कोई लाभ युवा वर्ग को नहीं मिला है। गलत आर्थिक नीतियों के चलते मंहगाई की मार से जनसामान्य त्रस्त है। खाद्यान्न, ईधन, परिवहन सबके दाम आसमान छू रहे हैं। जनता की जिंदगी दूभर हो चली है। महिलाओं-बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही है। अपराधों पर नियंत्रण में राज्य सरकार पूर्णतया विफल रही है।  

भाजपा सरकार ने नागरिकता बिल लाकर देश और समाज को बांटने की साजिश की है। इस बिल से समाज के बड़े वर्ग में तनाव और आक्रोश व्याप्त हो गया है। यह केन्द्र सरकार की बहकाने की राजनीति का हिस्सा है ताकि जनता का ध्यान मूल मुद्दों और आर्थिक मंदी से भटकाया जा सके।

समाजवादी पार्टी की मांग है कि-

  • बन्द चीनी मिलों को तत्काल चालू कराया जाए।
  • धान क्रय केन्दों पर किसानों से धान व खरीद न करके बिचैलियों के माध्यम से खरीदा जा रहा है। किसान धान औने पौने दाम पर बेचने को मजबूर है। धान केन्द्रों पर बोरे तक उपलब्ध नहीं है। पुवाल/पराली जलाने के नाम पर बहुत से किसानों पर फर्जी मुकदमा दर्ज किये गये हैं उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।
  • किसानों पर लगे ऐसे मुकदमें वापस किए जाएं तथा उन पर लगाये गये आर्थिक जुर्माना को समाप्त किया जाए।
  • खाद, बीज आदि के मूल्यों में वृद्धि के कारण किसान खरीद नहीं पा रहा। आलू उत्पादकों को आलू की लागत के अनुसार समर्थन मूल्य दिया जाए। आलू किसानों के आलू उपज की खरीद की व्यवस्था किया जाना चाहिए।
  • ओलावृष्टि से सरसों, गेंहू की फसल चौपट हो गई है। किसानों को इसका मुआवजा दिया जाना चाहिए।