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अखिलेश यादव से मिलकर प्रयागवाल सभा के पुरोहितों ने रखी अपनी मांग
November 17, 2019 • Edge express • उत्तर प्रदेश

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से आज तीर्थ पुरोहितों की प्रधान संस्था प्रयागवाल सभा प्रयाग के अध्यक्ष जितेन्द्र गौड़ और महामंत्री राजेन्द्र पालीवाल के साथ आए तीर्थ पुरोहितों के एक दल ने भेंट कर अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। इनके साथ पूर्व ब्लाक प्रमुख फाफामऊ संदीप यादव तथा प्रयाग के युवा नेता राहुल यादव भी थे।

श्री यादव ने तीर्थपुरोहितों का सम्मान करते हुए उनकी मांगो के प्रति सहानुभूति जताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थानों की पवित्र स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। संगम तट पर राजा हर्षवर्धन के द्वारा कुम्भ के अवसर पर दान पुण्य की तमाम कथाएं है। उनसे भावनात्मक एवं धार्मिक लगाव है। श्री यादव ने कहा कि प्रयागराज में अक्षयवट के दर्शनों पर रोक लगाना उचित नहीं। जहां वह स्थित है उस किले को केन्द्र सरकार को उत्तर प्रदेश सरकार को दान दे देना चाहिए। प्रयाग के तीर्थ पुरोहितों के प्रतिनिधिमण्डल में संतोष भारद्वाज, जितेन्द्र गौड़, वीरेन्द्र तिवारी, दिनकर पाण्डेय, अमरनाथ तिवारी, नितिन भारद्वाज, गोविन्द मिश्र, अवनीश शर्मा, पंकज शोकहा, लकी पाण्डेय, पंकज शर्मा तथा प्रभाकर शर्मा शामिल थे। 

पुरोहित समाज ने अखिलेश यादव को वर्श 2022 के विधानसभा चुनावों में बहुमत से जीत तथा मुख्यमंत्री बनने का आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर आप जनकल्याण के मार्ग पर ही चलना। प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष जितेन्द्र गौड़ ने अखिलेश यादव को दिए गए ज्ञापन में कहा कि प्रयागराज में संगम क्षेत्र स्थित प्रयागवाल तख्त सहस्रो वर्षों से स्थापित हैं। सनातन धर्म के स्थापनाकाल से कभी अन्याय नहीं हुआ। संगम तट पर 112 तीर्थपुरोहित सूचीबद्ध हैं। गत 14 नवम्बर 2019 को अचानक प्रशासन और छावनी परिषद ने उनके स्थान को ध्वस्त कर दिया। तीर्थयात्रियों के पारिवारिक बहीखाते, वंशावली उसमें नष्ट हो गए। उन्होंने कहा कि बगैर सूचना ध्वस्तीकरण की अन्यायपूर्ण कार्यवाही है।

प्रयागवाल सभा ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि अपने खर्च पर तीर्थपुरोहितों की क्षतिपूर्ति करे। महामंत्री राजेन्द्र पालीवाल ने कहा कि मांग पूरी न होने पर धरना, प्रदर्शन और आमरण अनशन किया जाएगा। प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष जितेन्द्र गौड़ ने बताया कि प्रयागराज में अक्षयवट के दर्शन भी बंद कर दिया गया है। इस पर भाजपा सरकार का मौन अनुचित है।