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अयोध्या में राम मंदिर बाद अब बीजेपी का होगा ये नया एजेंडा
November 10, 2019 • Edge express • राष्ट्रीय

भाजपा के लिए नए लक्ष्य का समअयोध्या में राम मंदिर का निर्माण लंबे समय से बीजेपी का एक मुख्य मामला रहा है. आज यह पार्टी जो कुछ भी है, इसी मामले की वजह से ही है. जहां एक तरफ उच्चतम न्यायालय का निर्णय बीजेपी कार्यकर्ताओं  समर्थकों को कुछ समय तक प्रसन्नता देगा, वहीं पार्टी के सामने अब चुनौती होगी अपनी आगे की यात्रा के लिए नया एजेंडा तय करने की.

यह मामला लंबे समय तक लंबित रहा था, जिसने पार्टी को अपना आधार बनाने  समर्थकों को संगठित रखने में पार्टी की खासी मदद की, लेकिन अब यह मील का पत्थर पार होते ही सबकुछ पीछे छूट जाएगा, तब यह सोचना पड़ेगा कि इसके आगे क्या?

यह भी हकीकत है कि 2014 में बीजेपी विकास के वादे के साथ सत्ता में आई थी. हमें यह नहीं पता कि 2024 के अगले आम चुनाव तक इसका कामकाज कैसा रहेगा. मुझे लगता है कि पार्टी की आवश्यकता अब यह है कि वह अब किसी ऐसे बड़े मामले को पहचाने  अपनाए, जो उसे सीधे लोगों से जोड़ता हो.

जरूरी नहीं है कि पार्टी का नया एजेंडा किसी आस्था या किसी तरह धर्म से जुड़ा हुआ ही हो. मुद्दा, दरअसल ऐसा होना चाहिए जो लोगों को यह संदेश देने में सफल रहे कि पार्टी अपने मतदाताओं  समर्थकों का वास्तव में पूरा खयाल रखती है. यह मामला विकास से जुड़ा हुआ भी होने कि सम्भावना है. वैसे यह घोषणा मुश्किल है कि लोग 2024 तक किन मुद्दों को पसंद करेंगे.

सुप्रीम न्यायालय के शनिवार के निर्णय पर कुछ लोग अपना अति-उत्साह प्रदर्शित करने के लिए बढ़-चढ़कर आगे आ सकते हैं. ये ऐसे लोग हो सकते हैं, जो यह चाहेंगे कि भावनाएं भड़कें. अगर ऐसा हुआ, तो इस समय सरकार पर रोजगार के नए मौका तैयार करने का जो दबाव बन रहा है, वह कुछ समय के लिए हल्का पड़ सकता है.

देश की सर्वोच्च न्यायालय को जो निर्णय आया है, उसमें सरकार की अपनी कोई किरदार नहीं है, लेकिन इस निर्णय ने सरकार को कुछ राहत तो दी ही है. खासकर आर्थिक मसलों पर सरकार के ऊपर जो दबाव बना था, वह इससे कुछ कम तो हुआ ही है, लेकिन यह एक अलग मसला है. हमें जो निर्णय मिला है, वह देश के सर्वोच्च कोर्ट का निर्णय है, जिसने दशकों पुरानी एक समस्या को निवारण तक पहंुचाने की प्रयास की है. किसी भी तरह से इसके जरिये विभिन्न धर्मों के धर्मावलंबियों के बीच तनाव फैलाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए.