ALL राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश अन्य राज्य अंतर्राष्ट्रीय मनोरंजन खेल बिजनेस लाइफस्टाइल आध्यात्म अन्य खबरें
भौमावती अमावस्या पर नैमिषारण्य तीर्थ में श्रद्धालुओं ने किया स्नान, दान एवं दर्शन
November 26, 2019 • Jyoti Singh • आध्यात्म

पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य में मंगलवार को अगहन मास की अमावस्या पर्व पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण यह भौमावती अमावस्या भी कहलाती है। सर्वप्रथम श्रद्धालुओं ने आदिगंगा गोमती एवं आस्था के केन्द्र चक्रतीर्थ में स्नान पूजन कर पुण्य एवं यश अर्जित किया। इस दौरान तीर्थ मे श्रद्धालुओं ने विधिविधान से तीर्थ के मंदिरों में दर्शन पूजन किया व मनौतियां मांगी। सुबह 4 बजे से ही तीर्थ व गोमती में स्नान एवं आचमन मार्जन के उपरान्त श्रद्धालुओं ने तीर्थ व गोमती पर पुरोहितों को अन्न एवं दक्षिणा भेंट कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

प्रातः काल ठंड के चलते स्नानार्थियों की संख्या में थोड़ी कमी दिखी, लेकिन सूर्य के उदय होते ही लोगों का तांता बढ़ता ही गया। चक्रतीर्थ स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मां ललिता देवी मंदिर में प्रसाद चुनर चढ़ाकर माथा टेका और पवित्र पंचप्रयाग तीर्थ का मार्जन किया। 

इसके उपरांत प्रमुख दर्शनीय स्थलों कालीपीठ, हनुमान गढ़ी, सूत गद्दी, व्यासगद्दी, देवपुरी मंदिर, बाला जी मंदिर, देवदेवेश्वर, महाकाली मनसा देवी मंदिर समेत अनेक मंदिरों में माथा टेका एवं मनौतियां मांगी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने प्रसिद्ध मन्दिरों में पूरे दिन भक्तों द्वारा पूजा-पाठ अनुष्ठानों का दौर चलता रहा। तीर्थ स्थल पर यजमानों पितृदोष निवारण के लिए अपने पुरोहितों से पिंडदान और तर्पण का कराया गया और सुख शांति की कामना की गई।

आज के दिन क्या करें-
आज अपने पितरों के निमित्त तर्पण करें, एवं गौ, ब्राह्मण को भोजन कराएं, अन्न दान करें ।

हेमाद्रौ_शातातपः ग्रन्थ के अनुसार-
'अमावस्या भवेद वारे यदा भूमि सुतस्य वै।
 जाह्नवी स्नान मात्रेण गो सहस्त्र फलं लभेत।।'

इस दिन किया गया जाप सहस्त्र गोदान के बराबर है। गायों को गुड़ खिलाने शुभ फल मिलता है। धन होने पर लाल वस्त्र, सोना आज दान करना चाहिए। जिन युवतियों के विवाह में मंगली दोष के कारण बाधा आ रही है। जन्म कुंडली में विवाह संबंध टूटने और वैधव्य का योग है उन्हे इन प्रभावों से मुक्ति के लिए भौमवती अमावस्या स्नान करना चाहिए। अमावस्या इस बात का संकेत है कि हम अपने पितरों को हर हाल में इस दिन श्रद्धा पूर्वक स्मरण करें और उन्हें भोग और तर्पण प्रस्तुत करें ताकि वे प्रसन्न हो।

रिपोर्ट- विवेक दीक्षित