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चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से......कंजूस चाचा की दिलदारी
May 3, 2020 • Edge express • मनोरंजन

आज जब मैं वरिष्ठ पत्रकार शैलेन्द्र सिंह के साथ प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा। तब चतुरी चाचा मुंशीजी से बतिया रहे थे। चबूतरे पर प्रपंच के दौरान दो गज की दूरी को ध्यान में रखते हुए कुर्सियां पड़ी थीं। हमेशा की तरह एक किनारे बाल्टी में पानी, मग और साबुन रखा था। दरअसल, चतुरी चाचा कोरोना महामारी से बचने के सारे नियम बड़ी कड़ाई से पालन करते और करवाते हैं। बिना मॉस्क पहने कोई भी प्रपंची प्रपंच चबूतरे पर बैठ नहीं सकता है। सबको प्रपंच में हिस्सा लेने के पहले अपने हाथ-पैर भी साबुन से धोना होता है। प्रपंच के दौरान चाचा सबको गुनगुना नींबू पानी और गिलोय का काढ़ा पिलाते हैं। इससे प्रपंचियों की इम्युनिटी पॉवर बढ़ती है।

मैं चतुरी चाचा और मुंशीजी से वरिष्ठ पत्रकार शैलेन्द्र भाई का परिचय करवा ही रहा था। तभी पच्छे टोला से कासिम मास्टर भी टपक पड़े। सबने अपनी-अपनी कुर्सियां संभाली और बतकही शुरू हो गई। चतुरी चाचा ने शैलेन्द्र सिंह से पूछा- पत्रकार महोदय, आप लखनऊ से इतनी सुबह कैसे आ गए? क्या कोई खास प्रयोजन है? तब शैलेन्द्र भाई ने बताया- दरअसल, आज सुबह 8 बजे वायुसेना के जहाज कोरोना योद्धाओं के सम्मान के लिए पूरे देश में उड़ान भरेंगे। सेना के हेलीकॉप्टर कोरोना वाले अस्पतालों पर पुष्प वर्षा करेंगे। सेना के बैंड वाले अलग-अलग शहरों में बैंड बजाकर कोरोना फाइटर्स का मनोबल बढ़ाएंगे। अभी कुछ देर बाद यह बड़ा ही अद्भुत कार्यक्रम होगा। आपके यहाँ बख़्शी का तालाब वायुसेना स्टेशन से भी लड़ाकू जहाज और हेलीकॉप्टर उड़ेंगे। उसी की कवरेज के लिए निकला हूँ। आपके प्रपंच चबूतरे पर भी कुछ देर बैठना था। इसलिए घर से जल्दी निकल आया।

इसी दौरान चंदू बिटिया गुनगुना नींबू पानी और गिलोय का काढ़ा लेकर हाजिर हो गई। पिछले सन्डे की तरह इस बार भी सबको नमस्ते की और कुर्सी पर ट्रे रखकर फुर्र हो गयी। हमने शैलेन्द्र भाई को बताया कि चतुरी चाचा ने अपने घर के गेट पर लक्ष्मण रेखा खींची है। चाचा के सख्त अनुशासन की वजह से लॉकडाउन पीरियड में कोई बाहर निकल नहीं सकता है। चतुरी चाचा के सत्प्रयास से गांव वाले भी घरों में ही रहते हैं। अगर कोई ग्रामीण बाहर जाता है तो मास्क लगाकर दो गज की दूरी का पालन करता है। मुंशीजी ने मेरी बात का समर्थन करते हुए कहा- चाचा यूँ तो बड़े कंजूस हैं, किंतु कोरोना महामारी में लोगों की दिल खोलकर सेवा कर रहे हैं। खूब मॉस्क और सेनिटाइजर वितरित कर रहे हैं। निर्धन परिवारों को राशन भी उपलब्ध करवा रहे हैं। इसी में कासिम चचा भी अपनी बात जोड़ते हुए बोले- बीच गाँव में तो चर्चा चल रही है कि चतुरी चाचा इस बार प्रधानी लड़ने की गुपचुप तैयारी कर रहे हैं। तभी चतुरी भाई पहली बार गाँव वालों पर रकम खर्च कर रहे हैं।

इतना सुनते ही चतुरी चाचा की भृकुटि तन गईं। चाचा बोले- कासिम भाई तुम्हारा हल हमेशा अलग ही चलता है। इतने साल से तुम मेरे करीबियों में हो, किंतु मुझे समझ नहीं पाए। मैं दिखावा में फालतू खर्च नहीं करता है। परन्तु, मैंने जरूरतमंदों की मदद हमेशा की है। इसका कभी ढिंढोरा नहीं पीटता हूँ। खैर छोड़ो, रिपोर्टर यह बताओ कि कोरोना की क्या स्थिति है? हमने कहा- कोरोना से मौतें जारी हैं। पूरी दुनिया में अबतक दो लाख 39 हजार लोग मर चुके हैं। वहीं, 34 लाख से अधिक लोग कोरोना से पीड़ित हैं। भारत में भी 37 हजार से अधिक लोग कोरोना से पीड़ित हैं। जबकि यहाँ 12 सौ से ज्यादा लोग काल कलवित हो चुके हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, मध्यप्रदेश व राजस्थान इत्यादि राज्यों में कोरोना तांडव कर रहा है। यूपी में करीब ढाई हजार लोग कोरोना से पीड़ित हैं। अबतक 40 से ज्यादा लोगों के प्राण जा चुके हैं। नोएडा, आगरा, कानपुर व लखनऊ इत्यादि 19 जिले रेड जोन में हैं। जबकि यूपी के 35 जिले ऑरेंज जोन में हैं।

इसी बीच पुरबय टोला से बड़के दद्दा और ककुवा की जोड़ी आ गई। चतुरी चाचा ने देर से आने पर उन दोनों से नाराजगी जाहिर की। इस पर ककुवा बोले- तुमार सबके तौ गेंहू कटि कय घरै आयगे। हमार तौ अबहीं ख्यातन मा खड़े अउ पड़े हैं। मजूर मिलि नाहीं रहे। ऊपर ते इंदर देवता आगि मुते हयँ। रबी केरी कटाई-मड़ाई के बखत आँधी-पानी-पाथर सबुकुछ आय रहा। अरे बसि हफ़्ता भरि मौसम खुला रहय तौ सबु काटि बीनि कय घरै आय जाई। सुना हय कि 17 मई तलक लॉकडाउन फिरि बढिगा हय। सब जने घरमा ही रहव भइय्या। सब जने कोई तना एकजुट होय कय कोरवाऊना का भागय देव। ईते भारत केर बड़ा नकसान होय रहा हय।

बड़के दद्दा बोले- कोरोना ने पूरी दुनिया को बहुत पीछे धकेल दिया है। साथ ही, पूरे संसार को नए सिरे से सोचने पर विवश कर दिया है। अब लोगों को भौतिक सुखों की अंधी दौड़ और अपनी आधुनिक जीवनशैली के बार में गम्भीरता से सोचना होगा। सरकार और समाज को ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और वायरस जनित नई-नई बीमारियों से सबक लेना चाहिए। प्रकृति से खेलना अब हर हाल में बन्द कर देना चाहिए। प्रकृति से दोस्ती करके ही मानव जाति स्वस्थ और दीर्घायु रह सकती है।

आसमान में तीन लड़ाकू जहाजों की गर्जना सुनकर पत्रकार साथी शैलेन्द्र ने कहा- नागेन्द्र भाई अब एयर फोर्स स्टेशन चलिए। चतुरी चाचा के चबूतरे से बड़ा ज्ञान मिल गया है। वायुसेना से आज की ख़बर भी ले ली जाए। यहीं पर आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले इतवार को फिर चतुरी चाचा के प्रपंच चबुतरे की बतकही लेकर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पंचव राम-राम।

__नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान