ALL राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश अन्य राज्य अंतर्राष्ट्रीय मनोरंजन खेल बिजनेस लाइफस्टाइल आध्यात्म अन्य खबरें
इस बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाने से होता है टाइफाइड...
November 30, 2019 • Jyoti Singh • लाइफस्टाइल

मियादी बुखार के रूप में जाना जाने वाला टाइफाइड बुखार एक संक्रामक बुखार है। यह बुखार साल्मोनेला बैक्टीरिया के संपर्क में आने से ही होता है। टाइफाइड बुखार में व्यक्ति के शरीर का तापमान 102 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है। साल्मोनेला टायफी बैक्टीरिया गंदे पानी और संक्रमित भोजन से फैलता है। टाइफाइड से पीडि़त व्यक्ति का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है।

अगर रोगी का व उसके आसपास साफ-सफाई का सही तरह से ख्याल रखा जाए तो आमतौर पर टाइफाइड से पीडि़त मरीज तीन से चार सप्ताह में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। वैसे तो इसका इलाज संभव है, लेकिन यह बेहद आवश्यक है कि इसके लक्षणों की पहचान करके जल्द से जल्द इलाज शुरू किया जाए। तो चलिए आज हम आपको टाइफाइड होने पर दिखाई देने वाले कुछ लक्षणों के बारे में बताएंगे। अगर आपको भी यह लक्षण नजर आएं तो इलाज में बिल्कुल भी देरी ना करें-

तेज बुखार
टाइफाइड का सबसे पहला और मुख्य लक्षण है बुखार होना। हालांकि टाइफाइड होने पर व्यक्ति का शरीर तपने लगता है। इस बुखार में तापमान 104 डिग्री तक भी हो सकता है। अत्यधिक बुखार के कारण व्यक्ति के शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है। वहीं तेज बुखार के साथ मरीज को ठंड लगती है। साथ ही कुछ स्थितयिों में त्वचा में रैशेज भी हो जाते हैं। टाइफाइड रैश छोटे गुलाबी स्पॉट होते हैं जिन्हें रोज स्पॉट भी कहा जाता है। यह रैशेज प्रत्येक स्थान पर लगभग 3 से 5 दिनों तक रहते है।

पेट में परेशानी
यह बुखार आपके पेट को परेशान कर सकता है। टाइफाइड रोगी को पेट में दर्द का अहसास होता है। इसके अलावा उसकी भूख कम या अधिक भी हो सकती है। कुछ मरीजों को तो टाइफाइड होने पर बिल्कुल भी भूख नहीं लगती। चूंकि इस बीमारी में आपका पेट सबसे अधिक प्रभावित होता है, इसलिए अक्सर लोगों को टाइफाइड होने पर कब्ज की शिकायत भी होती है। वैसे मरीज को पेट के दर्द के साथ−साथ सिर में भी दर्द होता है और यह पेट दर्द व सिरदर्द लगातार बना रहता है।

अन्य लक्षण
इन लक्षणों के अलावा भी कुछ लक्षण होते हैं, जो टाइफाइड के मरीजों में दिखाई देते हैं। जैसे उल्टी होना, दस्त होना, चेस्ट में कंजेशन, सुस्ती, पसीना आना आदि। टाइफाइड में जहां बड़ों को कब्ज होने का खतरा होता है, वहीं बच्चों में दस्त की समस्या देखी जाती है।