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करें ये योगासन मिलेगी सीने के दर्द से राहत...
December 19, 2019 • Jyoti Singh • लाइफस्टाइल

यूं तो सीने में दर्द के कई कारण होते हैं। इनमें आपके दिल संबंधी, फेफडे़ संबंधी व मांसपेशी संबंधी कारण अधिक होते हैं लेकिन अक्सर देखने में आता है कि ठंड के मौसम में लोगों को सीने में दर्द की शिकायत अधिक होती है और इसका कारण होता है ठंड की वजह से सीने में जकड़न। इस तरह होने वाले सीने के दर्द को योगासन के जरिए आसानी से ठीक किया जा सकता है। तो चलिए आज हम आपको इन्हीं योगासनों के बारे में बता रहे हैं-

सूक्ष्म व्यायाम-
योगासन की शुरूआत आप सूक्ष्म व्यायाम से करें। सभी ज्वाइंट्स को नेचुरल मूवमेंट देना ही दरअसल सूक्ष्म व्यायाम कहलाता है इसलिए आप अपने शरीर के ज्वाइंट्स को आराम से और सही तरह से मूव करें। इसके अलावा आप बेड से उठते समय अंगड़ाई लेकर उठने की आदत डालें। इससे भी आपके ज्वाइंट्स खुलते हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम-
सीने में दर्द से राहत के लिए डीप ब्रीदिंग काफी कारगर होती है। ऐसे में आप भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास जरूर करें। पद्मासन या फिर सुखासन में बैठ जाएं। कमर, गर्दन, पीठ एवं रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर को बिल्कुल स्थिर रखें। इसके बाद बिना शरीर को हिलाए दोनों नासिका छिद्र से आवाज करते हुए श्वास भरें। करते हुए ही श्वास को बाहर छोड़ें। अब तेज गति से आवाज लेते हुए सांस भरें और बाहर निकालें। हमारे दोनों हाथ घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रहेंगे और आंखें बंद रहेंगी। अगर आप चाहते हैं कि इस प्राणायाम से आपको बेहतर परिणाम मिले तो आप श्वास भीतर लेने के बाद कुछ देर रोकने का प्रयास करें। इससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा भरपूर हो जाता है और साथ ही सीने में जकड़न भी कम होती है। चेस्ट रिजन के मसल्स मजबूत होते हैं और सर्कुलेशन भी बेहतर होता है।

सूर्य नमस्कार-
सूर्य नमस्कार में 12 आसनों का अभ्यास किया जाता है। सूर्य नमस्कार के अभ्यास से सिर्फ सीने में दर्द ही नहीं, बल्कि अन्य कई बीमारियों से भी आपको छुटकारा मिलता है।

प्रणामासन-
इसके लिए सर्वप्रथम छाती को चौड़ा और मेरूदंड को खींचें। एडि़यां मिली हुई हो और दोनों हाथ छाती के मध्य में नमस्कार की स्थिति में जुड़े हो और गर्दन तनी हुई व नजर सामने हो। अब आराम से श्वास लें और इस मुद्रा में केवल कुछ क्षण ही रूकें।

हस्तउत्तानासन-
अब सांस को धीरे से अंदर खींचते हुए हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं और हथेलियों को मिलाएं रखें। अब जितना ज्यादा हो सके, कमर को पीछे की ओर मोड़ते हुए अर्धचन्द्राकार बनाएं। जितनी देर संभव हो, श्वास को रोकने का प्रयास करें। यह आसन फेफड़ों के लिए काफी अच्छा माना जाता है।

पादहस्तासन-
अब श्वास छोड़ते हुए व कमर को आगे झुकाते हुए दोनों हाथों से अपने पंजों को पकडें। इस दौरान पैरों को जितना ज्यादा हो सके, सीधा रखें। अब दोनों पैरों को मजबूती से पकड़कर सीधा रखें और नीचे झुकने की कोशिश करें।

अश्वसंचालन आसन-
अब श्वास भरते हुए दोनों हाथों को मैट पर रखें और नितंबों को नीचे करें। सीधे पैर को खींचते हुए जितना ज्यादा हो सके, पीछे की ओर रखें। अब पैर को सीधा मैट के ऊपर रखें और वजन पंजों पर रखें। आप चाहें तो घुटना मोड़कर भी मैट पर रख सकते हैं। अब ऊपर देखते हुए गर्दन पर खिंचाव को महसूस करें। यह बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मददगार है।

संतोलासान-
धीरे−धीरे श्वास छोड़ें और उल्टे पैर को पीछे लेकर जाएं। इस दौरान हाथों को सीधा कंधों की चौड़ाई के बराबर मैट पर रखें। अब कूल्हे की तरफ से स्वयं को ऊपर उठाएं। इस पोज में आपका शरीर उल्टे वी के समान दिखाई देगा। इस समय आपका पेट अंदर व कसा हुआ हो और नाभि अंदर मेरूदंड की तरफ खिंची हुई हो। यह आसन पेट को मजबूत बनाता है।

अष्टांग नमस्कार-
श्वास को रोकते समय दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़ें। अब दोनों घुटनों व छाती को मैट पर लगाएं। दोनों कोहनियों को छाती के नजदीक लाएं। अब छाती, दोनों हथेलियां, पंजे, और घुटने जमीन पर छूने चाहिए और शेष अंग हवा में हों।

भुंजगासन-
सबसे पहले मैट पर उल्टे होकर लेते जाएं। अब श्वास लेते हुए कोहनियों को कसें। अब छाती को ऊपर की ओर उठाएं व कंधों को पीछे की तरफ कसें। लेकिन घुटनों व पंजों को मैट पर देखें। आपकी दृष्टि ऊपर की ओर होनी चाहिए।

पर्वतासन-
धीरे से श्वास छोड़ते हुए पंजों को अंदर करें, कमर को ऊपर की ओर उठाएं और हथेलियों, पंजों को मैट पर रखें। निश्चित करें कि एडि़यां मैट पर रहें। ठुड्डी को नीचे की ओर करें।

अश्वसंचालन आसन-
श्वास भरते हुए दाएं पैर को आगे दोनों हाथों के बीच में लाएं। बाएं पैर को पीछे पंजे पर ही रहने दें व घुटनों को नीचे मैट पर रख लें। दाएं पैर को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें और जांघ को मैट के समानांतर रखें। अपने हाथों को सीधे मैट पर रखें। सिर व कमर को ऊपर की ओर उठाएं ताकि आप ऊपर की ओर देख सकें।

पादहस्तासन-
अब श्वास छोड़ते हुए व कमर को आगे झुकाते हुए दोनों हाथों से अपने पंजों को पकडें। इस दौरान पैरों को जितना ज्यादा हो सके, सीधा रखें। अब दोनों पैरों को मजबूती से पकड़कर सीधा रखें और नीचे झुकने की कोशिश करें।

हस्तउत्तानासन-
श्वास भरते हुए दोनों हाथों को एक साथ ऊपर की ओर लेकर जाएं। जितना ज्यादा हो सके, कमर के निचले हिस्से को आगे की ओर तथा ऊपरी हिस्से को पीछे की ओर लेकर जाएं। जैसे ही आप हाथों को अपने सिर के ऊपर से पीछे की ओर लेकर जाएंगे, उसी समय आप संवेदना के साथ ऊर्जा का संचार महसूस करेंगे।

प्रणामासन-
अंत में श्वास छोड़ते व कमर को सीधा करते हुए हाथों को अपनी छाती के पास नमस्कार मुद्रा में लेकर आएं। कुछ क्षण इसी देर में रूकें।

शवासन-
सूर्य नमस्कार के बाद शरीर को रिलैक्स करने के लिए अंत में शवासन का अभ्यास अवश्य करें। शवासन का अभ्यास करने के लिए आप किसी शांत जगह पर आसन बिछाकर लेट जाएं। दोनों हाथों को शरीर से कम से कम 5 इंच की दूरी पर करें। दोनों पैरों के बीच में भी कम से कम 1 फुट की दूरी रखें। हथेलियों को आसमान की तरफ रखें और हाथों को ढ़ीला छोड़ दें। शरीर को ढ़ीला छोड़ दें। आंखों को बंद कर लें। अब हल्की−हल्की सांस लें। पूरा ध्यान अब अपनी सांसों पर केंद्रित करें। कुछ ही देर में आप खुद को काफी रिलैक्स महसूस करेंगे।

अन्य टिप्स
सुबह उठकर सबसे पहले गर्म पानी पीएं। कोशिश करें कि पानी गर्म करते समय आप उसमें थोड़ी हल्दी डाल दें। हल्दी के पानी से सर्दी के कारण पैदा हुई अकड़न ठीक हो जाती है। चाय की जगह ग्रीन टी या गर्म पानी में नींबू और शहद डालकर पीएं।