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नगर पालिका परिषद क्षेत्र की सीमा के अंदर धड़ल्ले से ईंटभट्ठे किए जा रहे संचालित
December 3, 2019 • Jyoti Singh • उत्तर प्रदेश

मोहम्मदी खीरी। मोहम्मदी खीरी एसडीएम साहिबा जरा किसानों की पराली और गन्ने की पत्ती की तरह नियम विरुद्ध चल रहे। ईट भट्टो पर भी अपनी नजरें इनायत कर लीजिए। जी हां, नगर पालिका परिषद क्षेत्र की सीमा के अंदर घनी आबादी के बीच धड़ल्ले से ईंटभट्ठे संचालित किए जा रहे हैं जबकि उच्च न्यायालय का आदेश तथा प्रदेश सरकार का शासनादेश है कि नगर परिषद के 5 किलोमीटर की दूरी के अंदर ईटभट्ठा स्थापित नहीं हो सकता, लेकिन किसानों की पराली और गन्ने की पत्ती पर गहरी नजर रखने वाले प्रशासनिक अधिकारी शायद इन ईटभट्टो की चिमनियों तक अपनी नजर नहीं पहुंचा पाते। इसलिए धड़ल्ले से ईटभट्टे संचालित हैं और नगर क्षेत्र की आबादी में जमकर प्रदूषण फैला रहे हैं।

मोहम्मदी नगर पालिका परिषद की सीमा के अंदर 2भट्टे धड़ल्ले से धुआं उड़ा रहे हैं। वहीं शासनादेश के अनुसार नगर क्षेत्र की सीमा के 5 किलोमीटर के अंदर ईट भट्टे नहीं होने चाहिए, लेकिन मोहम्मदी में हालत उल्टी है। यहां आधा दर्जन से अधिक भट्टे 5 किलोमीटर की सीमा के अंदर हैं और आबादी के बीचो-बीच एक तरफ जहां किसान की पराली और गन्ने की पत्ती पर प्रशासन की गहरी नजर है। जिन भट्टों पर दिन-रात जेसीबी से खुदाई करके मिट्टी की ढुलाई होती है और तहसील के अधिकारी रोज आंकड़े देते हैं कि उन्होंने कितने किसानों पर जुर्माना किया है लेकिन इन अधिकारियों को नियम विरुद्ध चल रहे।

ईटभट्टों की असलियत दिखाई नहीं देती विदित हो कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश के जनपद अमेठी के ग्राम सभा मोचवां के पास ईट भट्टे का संचालन तत्काल बंद करने का निर्देश देते हुए कहा था कि व्यक्ति का जीवन बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए आबादी क्षेत्र के बहुत करीब ईट भट्टा चलाया जाना गैरकानूनी है उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेश के अनुसार भी कोई ईट भट्ठा नगर पालिका परिषद की सीमा से 5 किलोमीटर की दूरी तक स्थापित नहीं हो सकता।

इसके अलावा आबादी क्षेत्र रजिस्टर्ड चिकित्सालय, सार्वजनिक इमारतों, स्कूल, धार्मिक स्थल, ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण के स्थान के आस-पास कोई भट्ठा नहीं चलाया जा सकता लेकिन मोहम्मदी नगर के अंदर दो ईट भट्टे संचालित हैं। एक तो नगर पालिका परिषद कार्यालय के आधा किलोमीटर के अंदर ही है और घनी बस्ती के बीचो-बीच है इन भट्टो से निकलने वाला धुआं और राख नगर के तमाम लोगों को बीमार करने के लिए पर्याप्त है लेकिन धड़ल्ले से चल रहे इन भट्टो पर प्रशासन की नजरें इनायत है जबकि यह ईट भट्टे न्यायालय के निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर तथा शासनादेश को ताक़ पर धरकर चलाए जा रहे हैं।

इसके अलावा भी विनीत भक्तों में तमाम खामियां हैं, ना तो यहां मजदूरों के लिए शौचालय की व्यवस्था है ना उचित पानी की। इसके अलावा ईट पाथने वालों के बच्चों को स्कूल भेजने की व्यवस्था भी इन ईट भट्ठा संचालकों द्वारा नहीं की जाती है। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों ने अवैध रूप से चल रहे इन ईट भट्टो की ओर से अपनी आंखें बंद कर रखी हैं। अब देखना है किसानों पर तो तमाम कार्रवाई हो रही हैं लेकिन इन उद्योगपतियों पर कब कार्रवाई होगी।

रिपोर्ट-सुखविंदर सिंह कम्बोज