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रोजगार की कार्ययोजना
April 24, 2020 • Edge express • उत्तर प्रदेश

रिपोर्ट-डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

कोरोना आपदा प्रबंधन को सुनिश्चित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब श्रमिकों के लिए रोजगार सृजन पर ध्यान दिया है। इस संबन्ध में उन्होने पहले ही एक कार्ययोजना बनाई थी। इसके मद्देनजर उन्होने संबंधित अधिकारियों को निर्देश भी दिए थे। इस कार्ययोजना पर हुई प्रगति को उन्होंने स्वयं देखा। लॉक डाउन ने श्रमिकों के समक्ष सर्वाधिक समस्या पैदा की थी। दिहाड़ी मिलना बंद हो गया था। इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने पूरे प्रदेश में कम्युनिटी किचेन शुरू कराए थे। जिससे मजदूरों व अन्य गरीबों का भरण पोषण चलता रहे। अब मुख्यमंत्री की योजना उनको रोजगार उपलब्ध कराने की है। मुख्यमंत्री शिक्षुता अर्थात अप्रेन्टिसशिप प्रोत्साहन योजना के तहत युवाओं को उद्योगों में प्रशिक्षण के साथ ढाई हजार रुपए का मासिक प्रशिक्षण भत्ता प्रदान किए जाने की व्यवस्था की गई है। एक वर्ष में एक लाख युवाओं को यह सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। इस योजना के से दो लाख युवाओं को लाभ दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने युवा हब के माध्यम से भी ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। प्रदेश में आगामी तीन से से छह महीनों के भीतर कम से कम पन्द्रह लाख लोगों के रोजगार सृजन की ठोस कार्य योजना बनायी जाएगी। एमएसएमई ओडीओपी,एनआरएलएम उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण,दीनदयाल उपाध्याय स्वरोजगार योजना,कौशल विकास मिशन,खादी ग्रामोद्योग तथा मनरेगा के माध्यम से रोजगार सृजन के कार्यों में तेजी लायी जाएगी। सरकार ने लाॅक डाउन के बाद रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का अभी से प्रयास शुरू कर दिया है। खाद्य और फल प्रसंस्करण के माध्यम से भी रोजगार देने की रणनीति बनायी जा रही है। ग्राम स्तर पर काॅमन सर्विस सेण्टर को मजबूत बनाया जाएगा।विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और कौशल विकास मिशन के तहत विभिन्न ट्रेडों में व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण दिलाए जाने की व्यवस्था भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इसपर क्रियान्वयन के निर्देश दिए। प्रायमरी के बच्चों को मिलने वाले यूनिफार्म और स्वेटर निर्मित करने को भी मुख्यमंत्री ने रोजगार से जोड़ा है। इसके लिए प्रशिक्षण की सिलाई और स्वेटर मशीनों की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने खाद्य और फल प्रसंस्करण विभाग को भी जिम्मेदारी दी है। इनके माध्यम से महिला समूहों को अचार,पापड़,पत्तल आदि बनाने के लिए सहयोग प्रदान किया जाएगा। इनके अलावा मास्क बनाने के कार्य से भी रोजगार सृजन किया जा सकता है। खादी के क्षेत्र में सोलर चरखों का संचालन,सोलर लूम स्थापित कर व्यापक प्रशिक्षण दिया जाएगा। दुग्ध समितियों का गठन कर डेरी उद्योग को भी सुदृढ़ किया जा सकता है।

उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी मार्केटिंग डिजाइनिंग और ब्राण्डिंग करते हुए उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश के कई क्षेत्रों में फूलों की उपज होती है। मुख्यमंत्री ने इसे भी रोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए।फूलों की खेती को इत्र,धूपबत्ती अगरबत्ती आदि बनाकर प्रोत्साहित किया जाएगा। मोबाइल रिपेयरिंग के सम्बन्ध में भी प्रशिक्षण दिलाकर रोजगार सृजित किया जा सकता है। लाॅक डाउन के बाद युवाओं को लोन मेला और रोजगार मेला लगाकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।