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स्थानीय क्षमता और पहल का निर्माण
May 28, 2020 • Edge express • उत्तर प्रदेश

रिपोर्ट-डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

लखनऊ विश्वविद्यालय कोरोना आपदा के दृष्टिगत अनेक गतिविधियों का संचालन कर रहा है। इसमें ऑनलाइन अकादमिक कार्यक्रमों के साथ आपदा प्रबंधन में सहयोग के प्रयास भी शामिल है। लॉक डाउन के प्रारंभ में ही विश्वविद्यालय ने कम्युनिटी किचेन की शुरुआत की थी। यहां से गरीबों को फूड पैकेट वितरित किये जा रहे है। इसी अवधि में विश्विद्यालय ने सेनेटाइजर निर्मित किया। इसके लिए एमओयू भी किया गया। बहुआयामी गतिविधियों के क्रम में कुलपति प्रो आलोक कुमार राय और उप्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ले. जनरल आर.पी. शाही के बीच महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गए। इसके अनुसार दोनो संस्थायें इंटर एजेंसी ग्रुप उप्र के सक्रिय सहयोग से विश्वविद्यालयों का नेटवर्क विकसित करेंगे। यह नेटवर्क प्रधानमंत्री के दस सूत्री एजेंडा के छठवें बिंदु के आधार पर विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम और गतिविधियों में आपदा प्रबंधन के मुद्दों केा शामिल करेंगे और शिक्षकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और उन सभी लोगों को संवेदनशील बनाने, और उनका मार्गदर्शन करने का कार्य करेंगे। प्रधानमंत्री के दस सूत्री एजेंडा में कोरोना के खिलाफ जंग संबन्धी मुद्दे शामिल है। सभी विकास क्षेत्रों को आपदा जोखिम प्रबंधन के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।

गरीब घरों से लेकर एसएमई तक बहु-राष्ट्रीय निगमों से लेकर राष्ट्र राज्यों तक सभी के लिए जोखिम कवरेज की दिशा में काम करना। आपदा जोखिम प्रबंधन में महिलाओं की अधिक भागीदारी और नेतृत्व को प्रोत्साहित करना। विश्व स्तर पर जोखिम मानचित्रण में निवेश करें। भूकंप जैसे खतरों से संबंधित जोखिमों के मानचित्रण के लिए, हमने मानकों और मापदंडों को स्वीकार किया है। हमारे आपदा जोखिम प्रबंधन प्रयासों की दक्षता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करें। आपदा मुद्दों पर काम करने के लिए विश्वविद्यालयों का एक नेटवर्क विकसित करना। सोशल मीडिया और मोबाइल प्रौद्योगिकियों द्वारा प्रदान किए गए अवसरों का उपयोग करें। स्थानीय क्षमता और पहल पर निर्माण। आपदा से सीखने का अवसर व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हर आपदा के बाद, उससे सीखने वाले सबकों पर शोध पत्र होते हैं जो शायद ही कभी लागू होते हैं। आपदाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया में अधिक सामंजस्य लाना।सस्टेनेबिलिटी के मुद्दों पर समावेशी विकास, ज्ञान और क्षमता निर्माण अत्यंत आवश्यक है। यूनिवर्सिटी व शिक्षण संस्थाओं का नेटवर्क आपदा प्रबंधन में सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की योजनाओं के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सेंडई फ्रेमवर्क के संकेतकों की देखरेख, निगरानी और विश्लेषण के लिए आपदा जोखिम प्रबंधन पर प्रधानमंत्री के दस सूत्री एजेंडा के अनुसार आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए रूपरेखा और यदि आवश्यक हो तो मध्य पाठ्यक्रम सुधार मिड कोर्स करेक्शन का सुझाव देगा। लखनऊ विश्वविद्यालय की तरफ से गतिविधियों का समन्वय करने के लिए नोडल अधिकारी के रूप में प्रो शीला मिश्रा, सांख्यिकी विभाग को नामित किया गया है। यूपीएसडीएमए की ओर से डॉ. भानु संयोजक इंटर एजेंसी व सचिव पीजीवीएस को नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। एक सप्ताह के अंदर दोनो नोडल अधिकारी संयुक्त योजना प्रस्तुत कर कार्य प्रारम्भ कर देंगे।